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Sunday, 19 July 2009

मैं नही मानता ...

सब कहते हैं मुहब्बत बहुत अच्छी चीज़ है ... किस्मत वालों को ही मुहब्बत मिलती है .... कम ही लोगों के आँगन में मुहब्बत का गुज़र होता है ... सब कहते हैं मुहब्बत खुशियाँ देती है ... मुहब्बत जीने की आस देती है ... मुर्दा और बे असर दिल में भी एहसास के शोलों को पलने पर मजबूर करती है ... बरसों से धड़कन की राह में निगाहें बिछाये दिल के दरवाज़े पर मुहब्बत इस कदर धड़कती है की वो नशे में चूर हो कर मुहब्बत की बाँहों के घेरों में जीने के सपने बुनने लगता है ... मुहब्बत हर निगाह को उम्मीद और इस रंग भरी दुनिया से लुत्फ़ अन्दोज़ होने का मौका देती है ... हर होंट को इक न बुझने वाली प्यास देती है ... सब कहते हैं मुहब्बत ऐसी होती है ,मुहब्बत वैसी होती है ... मुहब्बत में ये होता है ..मुहब्बत में वो होता है ... मैं भी मानता था ... दिल भी उस जानिब कभी कभी जाता था ... सोचता था काश मुझे भी ऐसा ही कुछ हो जाता ... पर करियर ने पों में बीदियाँ डाल दी थी मैं चाह कर भी उस जानिब क़दम बढ़ने के बारे में नही सोच सकता था ... ज़िन्दगी की गाड़ी उसी रफ़्तार के साथ कुछ सांसों के दम पर आगे बढती जा रही थी ... आज भी रफ़्तार में है ... लेकिन वो फलसफा मुहब्बत ऐसी होती है मुहब्बत ऐसी होती है ... अब में इस से राज़ी नही हूँ ... मैं नही मानता इसे ... मान भी लेता हूँ ...दिल के मजबूर करने पर ...मगर फिर वही दिल कहता है ...नही ...ऐसा नही है ... मेरा दोस्त भी , साथी भी उसे मैं समझता था ...शायद वो भी कुछ ऐसा ही रिश्ता रखता था ... हाँ ..हंसने का आदि था ... हर वक़्त बोलना ... इक दोसरे को बोलने पर मजबूर करना आदत थी उसकी ... माहोल भी कुछ अच्छा ही लगता था उस के होने से शायद सिर्फ़ मुझे पर नही यहाँ तो बहुत सारे लोग थे ... पर अब शायद कुछ बदल गया था ... मैं सोच करता था शायद ज़िन्दगी ने उसे हर वो चीज़ दी है जिस की चाहत उस ने की है मगर नही वो तो अजीब तूफ़ान अपने दिल में पाले हुए था ... बात बात में निकली थी उस दिन वो बात ... हां पहली बार शायद मैं ने उस के चेहरे पर ऐसा असर देखा था ... हाँ ग़म में में डूबा कुछ अजीब सा लग रहा था ... पोछने पर बताया था ... हाँ मुहब्बत थी उसे भी ....किसी से ... सब से ज्यादा ...अपने आप से भी ... मगर उस मुहब्बत का नाम आते ही चेहरे की रौशनी ख़तम हो गई थी उस की ... रास्ते बदल गए थे दोनों दिलों के .... लेकिन सड़क पर लगे तमाम दरख्तों की शकेन उसे दिल की रहगुज़र से जुड़ी थी ... वो चाँद उसे नही मिल सका था ... मैं ने बहुत करीब से देखा था उस की आँखों में उथल पथल कर रहे आन्सो के कतरों को ... कब पानी की इक बूँद बन कर रुखसारों से होते होए ढलक जाए अंदाजा नही लगाया जा सकता था ... दिलासा भी काम नही आया ... कुछ देर इधर उधर की बातों से ध्यान को उस चेहरे से हटाया था ...उस के आंसू बहने से बचे थे ...लेकिन उस दिन मैं ने मुहब्बत मुहब्बत के फलसफे को झुठलाना चाहा था ... इक चेहरा जिस को मैं ने सिर्फ़ हँसते हुए देखा था ... उस ने झगडा भी किया पर आंसू या दर्द हो उस की आंखों ऐसा कभी नही हुआ था ... मैं सोच रहा था अगर कोई चीज़ ऐसी है जो हंसने के आदि शख्श को भी आंसुओं में डूबने पर मजबूर कर सकती है तो फिर ऐसी मुहब्बत को खैरबाद .... नही होनी चाहिए ऐसी मुहब्बत जो किसी मुस्कुराते चेहरे की हँसी चीन ले ... मुहब्बत ऐसी होती है मुहब्बत वैसी होती है एतेबार करने का दिल नही करता ... जो खुशी, हँसी,और जीने की तमन्ना चीन कर ग़म ,दर्द ,आंसू ,तन्हाई और ज़िन्दगी में कुछ करने का अजम भी चीन ले ऐसी हर मुहब्बत को बाय बाय ... मैं नही मानता मुहब्बत ऐसी होती है मुहब्बत वैसी होती है .... हाँ मानता था ...पर ... अब नही ... किओं की देखा है मैं ने ऐसा कुछ ... जो मुझे इस से रोक रहा है .........

9 comments:

Sonalika said...

मोहब्‍बत करने वालो को हंसी कैसी खुशी कैसी
मुसीबत सर पर रहती है कभी कैसी कभी कैसी

हर मुहब्‍बत का अंजाम जुदाई नहीं होता रजी जी।

एक बार फिर आपकी कलम का जादू चला और बेहतरीन रचना ने अंजाम पा लिया। बडी़ खूबसूरती से पिरोया है अफसाने को।

ओम आर्य said...

kaya kahe muhababt me sab kuchh yahi hota hoga shaayad jo kuchh aapane likha hai .....ek sundar khyal

M VERMA said...

बहुत सुन्दर लिखा है.

‘नज़र’ said...

बहुत ख़ूबसूरत ख़्याल !
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अनिल कान्त : said...

आपने बहुत बेहतरीन लिखा है ...एहसासों को....रिवाजों को ...

मेरी कलम - मेरी अभिव्यक्ति

nidhitrivedi28 said...

You are right...

Murari Pareek said...

waah bahut hi jivant ahsaas ghazab!!

Nirmla Kapila said...

बहुत सुन्दर हैहर एहसास अगर कहानी लिखें मगर हर प्यार की दास्तां दर्द नेहीं होती ये सब से खूबसूरत एह्सास है किस मे कितना दम है इस एहसास को बनये रखे ये आदनी पर निर्भर करता है मगर किसी एक के लिये लिखी गयी ये खूब्सूरत कहनी दिल को छू लेती है बहुत बडिया लिखते हो आशीर्वाद्

Amrit said...

kya khoob baya kiya hai muhhabat ki chahat ko aapne...padh kar laga ki apko muhhabat hui to nahi hai lekin karna jaroor chahte hai....ha ye khoobsurat hai lekin utni hi dukhdayi hi jitna aap soch rahe hain...khair bhavishya ke liye prayatn kijiye khoobsurat muhhabat khud b khud aapke kadmo me hogi...lekhan ke liye shubhkaamnaye