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Friday, 17 July 2009

एहसास की ताक़त ....


तुम में ज़रूर कोई बसा है ... हाँ तुम ने ज़रूर किसी से धोका खाया है ... बताओ न उस का क्या नाम था ... उस ने तुम्हें छोड़ किओं दिया ... अब वो कहाँ है ... वो ... अरे रुको भी या बोलते ही रहो गे ...तुम किस के बारे में कह रहे हो ... ऐसी कोई बात नही मैं ने किसी से धोका नही खाया ... मेरा कोई कभी था ही नही जो मुझे छोड़ कर जाता ... अच्छा अब ज़्यादा होशियार मत बनो और बता दो वो अभी कहाँ होगी ... कोई नही है मैं ने कहा ना ... अच्छा तो फिर ऐसे दर्द में डूबी नज्में और ग़ज़लें कैसे लिखते हो ... कोई नही मान सकता की तुम ने किसी से प्यार में धोका नही खाया है ...समझे ...बताओ या ना बताओ ... अरे सुनो बेकार की बातें मत करो ... क्या ऐसी कवितायें प्यार में धोका खाने के बाद ही लिखी जा सकती हैं ... क्या मैं सिर्फ़ महसूस कर के नही लिख सकता ...कुछ टूटे फूटे शब्दों को इक तार में जोड़ना सिर्फ़ प्यार के बाद ही होसकता है क्या ... मैं प्यार नही किया है पर मैं ने महसूस किया है ज़रूर ... हाँ वो मेरा दोस्त भी था ...भाई और साथी भी ...मैं ने उस की हालत देखी है ... रात जब पूरी दिल्ली सोती थी उस की सिस्किओं से आँख खुल जाती थी ...कभी उस की हँसी जगा देती थी ...कितनी देर तक वो बातें करता था ... हमेशा हंसने और हँसाने वाला मेरा दोस्त जब किसी रात रोता तो मुझे इस प्यार के बारे में कुछ न कुछ जानने को ज़रूर मिल जाता था .... जुदाई , फुरक़त और तन्हाई मैं ने बहुत नज़दीक से देखी है वही सब हादसे जब आँखों से गुज़रते हैं तो कुछ शब्दों की कुछ मालाएं बुन डालता हूँ ... तुम बार बार यही कहते हो की मुझ में कोई है ... हाँ है ... मेरा दिल ... जो हर दर्द को महसूस करने का आदि बन चुका है ... किसी के आंखों में आंसू या दिल में तड़प देख कर उसे अपने अन्दर उतारने का ... हाँ इसी वजह से मैं इस तरह की चीजें लिखने की कोशिश करता हूँ ...समझे ...अहसास में वो ताक़त है जो कुछ भी करवा सकता है ... हाँ कोई भी कुछ भी लिख सकता है ... दिल के अन्दर महसूस करने की शक्ति होनी चाहिए ....

7 comments:

Nirmla Kapila said...

वाह ये तो वही विष्य है जिस पर मेरी आज की पोस्ट है बिलकुल सही कहा आपने संवेदनाओं को व्यक्त करने के लिये केवल एक भावुक कोमल दिल की जरूरत होती है ये जरूरी नहीं कि हर रचना लेखक की ज़िन्दगी से जुडी हो लाजवाब बधाई

Sonalika said...

itna bhi asan nahi hota kuch bhi likh dena
tumahra andaj hi aisa jis per shak ho jaye

tumhari lekhni ka jadu hai ki sab sochne per majboor ho jaye

ab is baar bhi tumne kamal ka likh diya hai

बेहतरीन

ओम आर्य said...

bahut had tak sahi hai ki samwedanaao kaa honaa jaruri hai sath me anubhaw ka hona atiaawashayak hota hai tabhi jaakar rachana me jaan aati hai ........aapki post sundar sandesh de raha hai

‘नज़र’ said...

बहुत भावपूर्ण अभिव्यक्ति है!
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Udan Tashtari said...

वाकई, अहसासों की ही ताकत है लेखन में...

vandana said...

jo dil mahsoos karta hai wo hi likh sakta hai.........sach kaha .

raj said...

ahsaas me sach hi boht taqat hoti hai....jab khud pe gujarti hai to ahsaaso me bhi jaan padh jati hai.....