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Wednesday, 15 July 2009

इक चेहरे पर दिल मरता है


इक चेहरे पर दिल मरता है
बस याद उसे ही करता है


मैं याद में पागल रहता हों
वो आंसू बन के टपकता है


मैं बात किसी से करता हूँ
वो दिल ही दिल में कुढ़ता है


ठेस कोई दिल को जो लगे
वो ज़ख्म पे मरहम रखता है


जब गर्मी बदन जलाती है
वो बादल बन के बरसता है

11 comments:

Sonalika said...

koi yadon ki tanhai me
chupke chupke siskata hai

सुशील कुमार छौक्कर said...

बहुत ही बेहतरीन।
ठेस कोई दिल को जो लगे
वो ज़ख्म पे मरहम रखता है

वाह। बताया नही आपने फोटो कहाँ से लाते हो।

Nirmla Kapila said...

bahut sundar kavita bhee aur ladaki bhi bahut bahut aasheervaad

Sheena said...

aapki kavita ki bhawnayein bahut hi khoobsurat hai. aur usse bhi jyada khoobsurat hai wo picture jo aapne lagayi hai

ओम आर्य said...

bahut hi khubsoorat khyal ke dhani hai aap.....bahut hi sundar lagi aapki rachana

अनिल कान्त : said...

दोनों ही बहुत अच्छे हैं

mehek said...

मैं याद में पागल रहता हों
वो आंसू बन के टपकता है


मैं बात किसी से करता हूँ
वो दिल ही दिल में कुढ़ता है
waah lajawab

‘नज़र’ said...

दिल जज़्बाती हो गया
-----------
गुलाबी कोंपलें · चाँद, बादल और शाम

awaz do humko said...

aap sabhon ka bahut shukriya
sushil kumar ji main photo google images se leta hoon aap ne pahle hi poocha tha main bata na saka tha us ke liye maafi chahta hoon

anil said...

बेहतरीन ..............! सुन्दर रचना !

Rajat Narula said...

ठेस कोई दिल को जो लगे
वो ज़ख्म पे मरहम रखता है

its just brilliant...