
तुम्हें हर पल सवरता देखता हूँ
मिलो या न मिलो हम से मगर
तुम्हारे ख्वाब हर दिन देखता हूँ
कोई चेहरा निगाहूँ में नही रुकता
तुम्हारे अक्स हरसू देखता हूँ
कभी तो हम मिलेंगे फिर कभी
यही अब मैं हमेशा सोचता हूँ
मेरी आँखें भी हो जाती हैं पुरनम
किसी मुफलिस को रोता देखता हूँ
अजब वहशत भरी दुनिया है जिसमे
मैं पल पल ख़ुद को मरता देखता हूँ
ये दिल किस तरह हो जाता है हल्का
मैं सब के ग़म में रोकर देखता हूँ
7 comments:
bahut hi khubsurat lagi yah post ..........likhane andaj bhi
प्यारी कविता लिखी आपने,
समझा में,
जब भावनाओं मे खो कर देखा,
bahut hi pyari rachna
जैसा प्रेम का अनुभव हुआ!
मेरी आँखें भी हो जाती हैं पुरनम
किसी मुफलिस को रोता देखता हूँ
अजब वहशत भरी दुनिया है जिसमे
मैं पल पल ख़ुद को मरता देखता हूँ
बहुत खूब लिखते हैं आप ....!!
milo ya na milo hamse magar
tumhaare khwab har din dekhta hoon
JIYO JIYO .............kya baat hai !
दिल की बातों को शब्दों में बखूबी ढालते हैं आप
Post a Comment