ज़िंदगी एक क़तरा बूंद है...बहुत ख़ूबसूरत, सुंदर, कोमल...मगर बूंद ही की तरह...अगर एक क़तरा बूंद समंदर में गिर जाए तो अपना वजूद खो देता है लेकिन अगर वही एक क़तरा किसी के प्यासे लबों तक पहुंच जाए तो तिश्नगी दूर हो जाती है, हां, और जब वही एक क़तरा सहरा की तपती रेत पर गिरता है तो कहीं गुम हो जाता है मगर जब किसी कमल के फूल पर गिरे तो उसकी क़िस्मत बदल देता है, जब वही एक क़तरा सीप में गिरता है तो किसी मोती को जन्म दे देता है...बस ऐसे ही है ज़िंदगी...एक क़तरा...अब वह क़तरा क्या है, यही ज़िंदगी का सारा सफर तलाश करता रहता है...
Whether you think you can or you cannot, you are always right
There is nothing on earth you want that you cannot have — if only you will mentally accept the fact that you can have it! There is nothing you cannot do — once your mind has accepted the fact that you can do it.
6 comments:
कोई ऐसा रिश्ता बने तो
कोई ऐसा मिले तो ...
बहुत सुन्दर भाव. सुन्दर रचना
बहुत खुब लिखा है .......सही है ऐसा रिश्ता मिलना भी चाहिये ........सुन्दर अभिव्यक्ति
kya khoobsoorat mano bhav hain .......sach koi aisa rishta mile to..........chahat ka khoobsoorat rang.
कोई ऐसा रिश्ता बने तो
कोई ऐसा मिले तो ...
लाजवाब रचना...सच्चा साथी मिलना बहुत मुश्किल काम है...
नीरज
meri dua hai tumhare sath jald hi mil jayega koi aisa
बहुत सी उपमाएं एक साथ लिख दी हैं...दुआ है कि जल्द ही कोई ऐसा रिश्ता आपको मिले... खूबसूरत रचना .बधाई
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