खुली आंखों से सपने देखता हूँतुम्हें हर पल सवरता देखता हूँ
मिलो या न मिलो हम से मगर
तुम्हारे ख्वाब हर दिन देखता हूँ
कोई चेहरा निगाहूँ में नही रुकता
तुम्हारे अक्स हरसू देखता हूँ
कभी तो हम मिलेंगे फिर कभी
यही अब मैं हमेशा सोचता हूँ
मेरी आँखें भी हो जाती हैं पुरनम
किसी मुफलिस को रोता देखता हूँ
अजब वहशत भरी दुनिया है जिसमे
मैं पल पल ख़ुद को मरता देखता हूँ
ये दिल किस तरह हो जाता है हल्का
मैं सब के ग़म में रोकर देखता हूँ







