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Monday, 10 January 2011

ये पल...


याद आएंगे ये चुलबुले से कुछ पल
दुनिया के झमेलों से थक हार कर
जब उठाएंगे पुरानी डायरी
सच बहुत याद आएंगे ये पल
सुबह बहुत देर से होती थी अपनी
चांद बहुत देर तक रौशन रहता था अपने साथ
पहले सूरज से अपनी दोस्ती थी
मगर अब बड़े हो गए थे हम
चांद के साथ अपनी अच्छी बनने लगी थी
सच बहुत याद आएंगे ये पल
जब थक हार कर लौटेंगे घर
ज़िंदगी के झमेलों से उक्ता कर
जब पुराना बक्सा खोलेंगे
लबों पर मुस्कुराहट और आंखों में आंसू
रेंगने लगेंगे खुद ही
बिछडे परिंदों की याद में
डाल-डाल, रात-रात साथ-साथ
उडते रहते थे जिनके संग
सच बहुत याद आएंगे ये पल
जब थक हार कर उठाएंगे पुराना अल्बम
मगर तब
जिंदगी की ज़रूरतें उसे देखने की फुर्सत नहीं देंगी!!!

18 comments:

शबनम खान said...

बहुत खूब रज़ी साहब....

Salahuddin said...

very nice.......
मगर तब
जिंदगी की ज़रूरतें उसे देखने की फुर्सत नहीं देंगी!!!
asal zindgi wahi hai jis me masayel aur zaroten hon.

अनामिका की सदायें ...... said...

khoobsurat abhivyakti.

संजय भास्कर said...

सार्थक और बेहद खूबसूरत,प्रभावी,उम्दा रचना है..शुभकामनाएं।

sada said...

बेहतरीन शब्‍द रचना ।

M VERMA said...

कुछ पल वाकई बहुत याद आते हैं

हरकीरत ' हीर' said...

चाँद से दोस्ती की बधाईयाँ .....
अच्छी नज़्म .....

क्रिएटिव मंच-Creative Manch said...

बहुत खूब
बहुत सुन्दर रचना
अच्छा लगा आकर

बधाई
आभार

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

यादों को समेटे खूबसूरत रचना ..

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी रचना आज मंगलवार 18 -01 -2011
को ली गयी है ..नीचे दिए लिंक पर कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया ..

http://charchamanch.uchcharan.com/2011/01/402.html

रचना दीक्षित said...

जब थक हार कर उठाएंगे पुराना अल्बम
मगर तब
जिंदगी की ज़रूरतें उसे देखने की फुर्सत नहीं देंगी.

बहुत सुंदर अभिव्यति, सुंदर शब्द संयोजन. बधाई.

रचना

अमृत कुमार तिवारी said...

एहसास को गर्म कर दिया आपने

राकेश कौशिक said...

"सुबह बहुत देर से होती थी अपनी
चांद बहुत देर तक रौशन रहता था अपने साथ
पहले सूरज से अपनी दोस्ती थी
मगर अब बड़े हो गए थे हम
चांद के साथ अपनी अच्छी बनने लगी थी"

बहुत सुंदर - बधाई

kshama said...

सच बहुत याद आएंगे ये पल
जब थक हार कर उठाएंगे पुराना अल्बम
मगर तब
जिंदगी की ज़रूरतें उसे देखने की फुर्सत नहीं देंगी!!!
Kaisa dukhdayi yatharth hai ye bhee!

डॉ.भूपेन्द्र कुमार सिंह said...

bahut khoobsoorat blog aur content bhi,sahab ,maza aagaya.salam aur thanks
dr.bhoopendra
rewa
mp

डॉ.भूपेन्द्र कुमार सिंह said...

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dr.bhoopendra
rewa
mp

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rewa
mp

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