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Sunday, 27 September 2009

मेरी आवाज़ ही पहचान है मेरी

कल एक ऐसी आवाज़ की मलिका का जन्म दिन है जिस के सुरों पर पूरी दुनिया झूमती है। जी हां कल लता मंगेशकर 80 साल की हो जाएंगी, मगर ये भी एक सच्चाई है की लता जी की आवाज़ से उन की उम्र का अंदाज़ा नहीं लगाया जा सकता है। 13 साल की उम्र से गाने का सफ़र शुरू करने वाली लता की आवाज़ में वो जादू आज भी उसी हालत में बरकरार है जैसा शुरूआती दिनों में था। मंदिरों में बजती घंटियों के जैसा जादू लिये लता की आवाज़ ने कई नसलों को अपना दीवाना बनाया। उन की आवाज़ की खनक आज भी सीधे दिल की गहराईओं में उतर जाती है।

28 सितम्बर 1929 को इन्दोर में गायक पिता दिनानाथ मंगेशकर शास्त्रीय के घर पैदा होने वाली लता ने अपना पहला गाना मराठी फिल्म किटी हसाल (1942) में गाया था। पिता को लता का फिल्मों में गाना नापसंद था इसलिए यह गाना फिल्म से हटा लिया गया। मगर जब पिता का निधन होगया और जिंदगी के सर से बाप का सहारा उठ गया तो लता ने घर चलाने के लिए फ़िल्मो मे काम करना शुरू कर दिया। मजबूरियों ने आवाज़ और सुरों की इस मलिका को अदाकारा बना दिया। हालाँकि अदाकारी मे वे सफल नही हो सकीं। मगर तकदीर तो उन्हें बुल्बुले हिन्द बनाने वाली थी, उन का जादू पूरी दुनिया के सर चढ़ कर बोलने के लिए था और शायद यही वजह है कि उन्हें अदाकारी के मैदान में नाकामियों का सामना करना पड़ा।

शुरू के कुछ दिनों में तो लता की आवाज़ के चर्चे तो हुए मगर उन्हें वह कामियाबी ना मिली जिसकी उनको तलाश थी। फिर फिल्म महल लता की जिंदगी में आई और लता को इतनी उंचाई पर पहुंचा दिया जहां पहुंचने का ख्वाब तो हर कलाकार देखता है मगर कम ही लोग वहां तक पहुंच पाते है। अपने वक्त की लाजवाब अदाकारा मधुबाला पर फिल्माया गया उनका गाना "आयेगा आने वाला" सुपर डुपर हिट रहा। यहां लता की जिंदगी का एक दौर ख़्तम होता है और फिर शुरू होता है कामियाबियों का ना ख़्तम होने वाला सिलसिला। 1949 में 'बरसात', 'दुलारी', 'महल' और 'अंदाज़' के गानों ने धूम मचाई और लता सब की पसंद बन गईं। उस वक्त शमशाद बेग़म, नूरजहाँ और ज़ोहराबाई अंबालेवाली जैसी वज़नदार आवाज़ वाली गायिकाओं का राज चलता था मगर लता के हिम्मत और हौसले ने उनको एक अलग पहचान दी और दुनिया ने ये मान लिया की ये नई आवाज़ दूर तक जाने वाली है।

ये एक हकीकत है कि 1950 के दशक में लता का सिक्का बॉलीवुड मे जम चुका था और वह किसी भी संगीतकार के लिए कामयाबी हासिल करने की कुंजी बन गईं थी। इस के बाद लता ने कभी पीछे मुड़कर नही देखा।

लता मंगेशकर अब तक 20 से अधिक भाषाओं मे 30000 से अधिक गाने गा चुकी हैं।

भजन, ग़ज़ल, क़व्वाली शास्त्रीय संगीत हो या फिर आम फ़िल्मी गाने लता ने सबको जिस महारत से गाया वह उनके एक महान फनकार होने की दलील है।

यही वजह है कि आज उनके पास अवॉर्ड की भरमार है। जहां फ़िल्म जगत का सबसे बड़ा सम्मान दादा साहब फ़ाल्के अवार्ड उनके नाम है वहीं देश का सबसे बड़ा सम्मान 'भारत रत्न' भी उनकी झोली में आ चुका है।

हमेशा नंगे पाँव गाना गाने वाली लता ने बहुत खूबसूरत गीत गाए है। आ जा अब तो आ जा, आ जाओ तडपते हैं अरमां, आ मेरी जान मैं तुझ में अपनी जान रख दूँ , ऐ मालिक तेरे बंदे हम, ऐसे हो हमारे करम, आईना वो ही रहता हैं, आज दिल पे कोई जोर चलता नहीं, आज कल पाँव जमींपर नहीं पडते मेरे, कांटों से खिंच के ये आंचल, तोड के बंधन बांधी पायल, आज सोचा तो आँसू भर आए, आजा पिया तोहे प्यार दूँ , आ जा रे परदेसी, अखियों को रहने दे,अखियों के आसपास, आप का खत मिला, आप का शुक्रिया, आप मुझे अच्छे लगने लगे, आप यूँ फासलों से गुजरते रहे, दिल पे कदमों की आवाज आती रही, दिल दीवाना बिन सजना के माने ना और जिया जले जां जले जैसे गानों में उन्हों ने मधुबाला से लेकर माधुरी और काजोल तक तमाम ही अदाकाराओं को अपनी आवाज़ दी और उन्हें बलंदियां छूने मे मदद की।

5 comments:

विनोद कुमार पांडेय said...

Ek Itihaas ban chuki hai lata ji,
janm din ki hardik shubhakamna lata ji...

Udan Tashtari said...

सुर सम्राज्ञि लता जी को जन्म दिन की बहुत बधाई.

ओम आर्य said...

सुर सम्राज्ञी लता जी को जन्म दिन की ढेरो बधाई!

sangeeta said...

lata ji ke janmdin par unko hardik badhai......aapko bhi badhai jinhone unake jeevan ke baare men prakash daala....

kshama said...

Lata ji ke bareme jitna padhun, jitna sunu kam hai...aur unkee awwaz..! Ek daivi duniyame le jatee hai..

"dile nadaan ' ye Raziya sultanaka ( jo unhon ne saksahtkaar me, Javd ji ke saath) bataya, mera bhee unke gaye pasandeeda ganon me se ek hai..waise to hazaron,lakhon hain...anginat...