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Saturday, 26 September 2009

सदाबहार अभिनेता देव आनंद

हिन्दुसतानी फिल्मी दुनिया में हजारों चेहरों ने अब तक जन्म लिया, अपनी अदाओं और अपने जलवों से लोगों को लुभाया, एक वक्त तक परदे पर राज भी किया मगर कामियाबी का ये सफर ज्यादा देर तक कायम न रह सका और सभी एक खास वक्त के बाद मुरझाए गुलाब की तरह बेमाना हो कर रह गए।

इन में कुछ लोग ऐसे हैं जिनके बहारों के गुलशन में कभी पतझड़ नही आया और उन की कामयाबी के फूल मुरझाए नहीं। उन्ही लोगों मे से एक पंजाब के गुरदासपुर कस्बे में 26 सितम्बर 1923 को जन्मे देव आनंद भी है। लाहौर कालेज से इंगलिश से ग्रेजुऐशन करने वाले देव का बचपन परेशानियों से घिरा रहा। एक वकील और आजादी के लिए लडने वाले पिशोरीमल के घर पैदा होने वाले देव ने रद्दी की दुकान से जब बाबूराव पटेल द्वारा सम्पादित फिल्म इंडिया के पुराने अंक पढ़े तो उस की आंखों ने फिल्मों में काम करने का सपना देख डाला, और वह मायानगरी मुम्बई के सफर पर निकल पडा।

तीस रूपए जेब में ले कर पिता के मुंबई जाकर काम न करने की सलाह के विपरीत देव अपने भाई चेतन के साथ फ्रंटियर मेल से 1943 में बंबई पहुँच गया। देव ने ये सपने भी ना सोचा होगा की कामियाबी इतनी जल्दी उसके कदम चूमेगी मगर ये तीस रुपए रंग लाए और जाएँ तो जाएँ कहाँ का राग अलापने वाले देव आनंदको मायानगरी मुम्बई में आशियाना मिल गया।

सन 1946 में हम एक हैं में पहली बार देव आनंदको काम करने का मौका मिला मगर उनकी सबसे पहली कामियाब फिल्म जिद्दी साबित हुई। जिद्दी ने देव आनंदको नई ऊंचाइयां अता कीं। यहां से जो सिलसिला शुरू हुआ वह दूर तक देव के हक में रहा और एक वक्त ऐसा आया जब देव आनंदहिन्दुसतानी फिल्मी दुनिया के उस्ताद कलाकारों में शुमार किए जाने लगे।

देव आनंदने लव एट टाइम्स स्क्वैर, हम नौजवान, देश परदेस, तेरे मेरे सपने, हरे रामा हरे कृष्णा, जॉनी मेरा नाम, ज्वैलथीफ, हम दोनों, माया, रूप की रानी चोरों का राजा, बम्बई का बाबू, लव मैरिज, काला पानी, दुश्मन, टैक्सी ड्राइवर, नौ दो ग्यारह, पेइंग गेस्ट, सी आई डी, फंटूश, बाज़ी बेमिसाल फिल्मों को अपनी अदाकारी के जरिए कामियाब बनाया। यही नहीं उन्होंने बतौर लेखक 1993 में प्यार का तराना नामी फिल्म की। इस के अलावा बतौर निर्माता 1998 में मैं सोलह बरस की और 1993 में प्यार का तराना लेकर सामने आऐ। यही नही बतौर निर्देशक लव एट टाइम्स स्क्वैर, मैं सोलह बरस की, गैंगस्टर और हम नौजवान जैसी फिल्में भी की।

देव आनंदअपनी खास स्टाइल के लिए जाने जाते हैं। उन्हों ने अपने किरदारों में नौजवानों की उमंगों, तरंगों और चंचलता को बहुत ही खूबसूरत अंदाज से पेश किया है।

देव आनंदआदर्शवाद और व्यवहारवाद में नहीं उलझते और न ही उन का किरदार प्रेम की नाकामियों से दो-चार होता है। अपनी अदाकाराओं के छेड़खानी, शरारत और फ्लर्ट करने वाला आम नौजवान देव का नायक रहा। देव ने अपने किरदारों में जवानी के हर मौसम का लुत्फ लिया। जवानी के तमाम दबे-कुचले अरमानों को पूरे रस के साथ जिया और नौजवानों के चहेते बन गए।

नौजवानों के जज़बात को परदे पर पेश करने वाले खूबसूरत देव हमेशा ही खूबसूरत लडकियों से घिरे रहे। हज़ारों दिलों की धडकन रहे देव हसीनाओं का सपना बन चुके थे। मगर देव फिल्मी दुनिया की रीत ने देव को भी अपने चपेट में ले लिया और वह भी मशहूर अदाकारा सुरैया के हुस्न के दीवाने बन गए। यही नहीं वह भी देव की दीवानी हो चुकी थी। 1948 में बनी ‘विद्या’ फिल्म की नायिका सुरैया थी। इसके सेट पर ही दोनों में प्यार हुआ। 1951 तक दोनों ने सात फिल्मों में साथ काम किया। मगर अफसोस दोनों के साथ रहने का ख्वाब पूरा ना हो सका। देव ने अपने टूटे प्यार का इजहार कई बार किया है। बाद में ‘टैक्सी ड्राइवर’ की हीरोइन मोना याने कल्पना कार्तिक से फिल्म के सेट पर शादी हो गई। मगर सुरैया ने देव के अलावा किसी और को गवारा ना किया।

देव आनंदको उनकी बेहतरीन अदाकारी के लिए कई पुरस्कार मिले। 1967 में फिल्म गाइड के लिए फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार और 1959 में फिल्म काला पानी

के लिए एक बार फिर फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार मिला। देव आनंद को सन 2001 में भारत सरकार ने कला क्षेत्र में पद्म भूषण से भी सम्मानित किया था।

3 comments:

M VERMA said...

सुन्दर आलेख देव आनन्द पर
देव जी अदा के अभिनेता थे और बला के खूबसूरत

kshama said...

Dev aanad kee sabse adhik jo film pasand aayee thee wo 'guide'...zyada films nahee dekhtee, isliye aur adhik nahee likh saktee...haan, kuchh badeehee ghatiya filme unhon ne banayee jaise 'hare raam hare krishna"...
lekin Raj Kapoor ne bhee 'Ram teree Ganga mailee' jaisee ghatiya film jeeven ke antim dinon me banayee...maine uske kewal kuchh ansh dekhe...

sangeeta said...

aapke is lekh se bahut si jaankari mili.....shukriya