Pages

Tuesday, 8 September 2009

दम मारो दम...

अपनी मीठी आवाज़ से राह चलते राही के कदम रूकने पर मजबूर करदेने वाली आवाज़ो की मलिका आशा भोसले आज 76 साल की हो गईंहै। फिल्म चुनरिया में सावन आया से अपनी प्यारी आवाज़ का सफरशुरू करने वाली आश आज भी संगीतकारों की पहली पसंद बनी हुई है।साल की उम्र हो जाने के बाद भी उन की आवाज में ऐसीमासूमियत बाकी है कि वो नई और छोटी उम्र वाली हिरोईनों कीआवाज बन जाती हैं। गीत, गज़ल, लोरी, भजन, राष्ट्रीय संगीत औरपॉप संगीत सभी को अपनी आवाज़ से सजाने वाली आशा फिल्मीदुनिया की वो महान हस्ती हैं जिनके चाहने वालों की एक लंबी तादादहै। 76

अपने शुरूआती दौर में नाकामियों की कडवाहटें पीने वाली आशा को जब संगीतकार ओपी नय्यर का साथ मिला तो उनकी आवाज के जादू ने सर चढ़ कर बोला। 1957 में रिलीज होने वाली बीआर चोपड़ा की फिल्म नयादौर उन की जिन्दगी में कामियाबियों के सौगात लेकर आई। उस के बाद से तो आशा भोसले ने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा। दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की करती रहीं यहां तक की संगीतकार और फिल्मकार उन्हें अपनी कामयाबी का ज़ीना बनाने लगे।

मशहूर डांसर हेलन की आवाज़ बनने वाली आशा ने उनके डांस स्टेप्स को समझते हुए उनकी कामयाबियों में हाथ बटाया। पिया अब तो आ जा, वो हसीना जुलफों वाली और ये मेरा दिल प्यार का दीवाना जैसे सुपर हिट गानों के जरिये तरक्की का सफर तय करने वाली आशा ने जब ऊमरावजान में दिल चीज़ क्या है आप मेरी जान लीजिए, इन आंखों की मस्ती के मस्तीने हजारों हैं, ये क्या जगह है दोस्तो और जुस्तुजू जिस की थी जैसी ग़ज़लों को जब अपनी आवाज से सजाया तो सारे संगीत प्रेमी झूम उठे।

ये तो हकीकत है कि नया दौर(1957),तीसरी मंजिल(1966),ऊमरावजान(1981) और रंगीला(1995) आशा भोसले की करियर के चार मील के पथ्थर माने जाते हैं। नया दौर में मांग के साथ तुमाहरा और उड़ें जब जब जुल्फें तेरी ने आशा को एक लोकप्रिय गायिका के रूप में दुनिया के सामने पेश किया। मगर इस के बावजूद आशा ने और बहुत सारी हिट गीतों को अपनी आवाज़ दी है।

चौदह ज़बानों मे गीत गाने वाली आशा ने तकरीबन 12,000 गाने रिकॉर्ड किए हैं। इस लंबे सफर में उन की कामयाबियों को काफी सराहा गया। अवॉर्ड भी दिए गऐ।

गरीबों की सुनो(दस लाख, 1966), परदे में रहने दो(शिकार, 1968), पिया तू अब तो आजा(कारवां,1971), दम मारो दम(हरे राम हरे किर्शना, 1972), होने लगी है रात(नैना, 1973), चैन से हमको कभी(परान जाए पर वचन न जाए, 1972) और ये मेरा दिल(डॉन, 1978) के लिए उन्हें बेस्ट फीमेल पलेबैक सिंगर का अवॉर्ड मिला। इस के अलावा बहुत सारे अवार्ड उनकी झोली में आए।

5 comments:

विनोद कुमार पांडेय said...

आशा जी को जन्म दिन की ढेर सारी बधाइयाँ ..

खुशदीप सहगल said...

आशा ही जीवन है...जीवन ही आशा है...आशा ताई को बहुत बहुत बधाई...जानवर्धक जानकारी देने के लिए साधुवाद

संगीता पुरी said...

आशा जी के बारे में बहुत जानकारी जुटायी है .. उन्‍हें जन्‍मदिन की बहुत बहुत बधाई !!

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

इस महत्वपूर्ण जानकारी के लिए आभार।
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

विनय ‘नज़र’ said...

आशा जी जनमदिन पर यह पोस्ट पढ़ना अच्छा अनुभव रहा!