
हर शाम तुम्हारी यादों का इक दीप जलाता रहता हूं
जो नग़मे तुम ने गाए थे उनको ही गाता रहता हूं
हर आन तुम्हारे मिलने की चाहत सी मचलती रहती है
हर लम्हा तेरी पलकों से सायों की ज़रूरत रहती है
फिर दूर कहीं वीराने में आवाज़ सुनाई देती है
चाहत के इस पागलपन में आवाज़ का पीछा करता हूं
हर शाम तुम्हारी चाहत का इक दीप जलाता रहता हूं
जाड़ों की ठिठुरती रातें हों या कजरारे बरसात के दिन
तुम साथ नहीं हो ऐसे में मैं क्या जानूं सौग़ात के दिन
दिल साथ तुम्हारे रहता है और सांसें चलती रहती हैं
एहसास सताता रहता है और धडकन धडकती रहती है
उम्मीद तड़प कर उठती है तुझे पाने को ज़िद करती है
चाहत के इस पागलपन में जाने क्या क्या करता हूं
हर शाम तुम्हारी यादों का इक दीप जलाता रहता हूं
जो नग़मे तुम ने गाए थे उनको ही गाता रहता हूं
17 comments:
kaya khubsurat gazal hai. bahut khub
बहुत से खूबसूरत एहसास लिए हुए है ये गज़ल... आभार...
...बेहद सुंदर गजल है ये...धन्यवाद!
रोचक तथा प्रशंसनीय प्रस्तुति
yaadon ke deep aur ek geet......bahut hi badhiyaa
खूबसूरत एहसास...खूबसूरत गजल...
amazing...amazing! :)
badhiya rachana.
बहुत बेहतरीन!
फिर दूर कहीं वीराने में आवाज़ सुनाई देती है
चाहत के इस पागलपन में आवाज़ का पीछा करता हूं
हर शाम तुम्हारी चाहत का इक दीप जलाता रहता हूं
waah....!!
viyog ras ka bahut hi khoobsurat geet .....!!
पूरी कविता ही बहुत अच्छी लगी। मगर ये पंम्क्तियाँ दिल को छू गयीर्
जाड़ों की ठिठुरती रातें हों या कजरारे बरसात के दिन
तुम साथ नहीं हो ऐसे में मैं क्या जानूं सौग़ात के दिन
दिल साथ तुम्हारे रहता है और सांसें चलती रहती हैं
एहसास सताता रहता है और धडकन धडकती रहती है
उम्मीद तड़प कर उठती है तुझे पाने को ज़िद करती है
चाहत के इस पागलपन में जाने क्या क्या करता हूं
हमेशा की तरह बहुत सुन्दर रचना है। शुभकामनअयें
bahut bahvpoorn gazal........aseem pyar samete hue.....
Beautiful blog ... well said Ga
zal ... All the best ... Keep on writing ...
मेरे व्यंग्य को सराहने का शुक्रिया।
यह गीत वाकई बहुत खूबसूरत रचना है।
चाहत के इस पागलपन में जाने क्या क्या करता हूं
हर शाम तुम्हारी यादों का इक दीप जलाता रहता हूं....
सुन्दर रचना ....
bahut hi mrmashparsi kavita jo ki dil ki gahraiyon utar jati hai
bahut hi mrmashparsi kavita jo ki dil ki gahraiyon utar jati hai
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