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Wednesday, 19 May 2010

गैर का ख़त मेरे नाम आया है


दफ्अतन तुम पे इक निगाह पड़ी
दिल की दुनिया को हार बैठे हम
ज़िंदगी थी मेरी अमानत--गैर
उसको तुम पर ही हार बैठे हम
####
वक्त रूख़्सत हुआ मोहब्बत का
अब के नफरत का दौर आया है
ज़िंदगी दर्द--दिल को पूजती है
तुम से बिछड़े तो याद आया है
अब के फिर ना मिलें ख़्यालों में
ख़्वाब में रो के हम ने पाया है
दर्द, आंसू, फरेब, दगा
ज़ख़्म अनगिनत तुम से खाया है
फिर वही भूल हो गई उससे
गैर का ख़त मेरे नाम आया है

26 comments:

AlbelaKhatri.com said...

umda............

kshama said...

दफ्अतन तुम पे इक निगाह पड़ी
दिल की दुनिया को हार बैठे हम
ज़िंदगी थी मेरी अमानत-ए-गैर
उसको तुम पर ही हार बैठे हम

Dono rachnaon me kasak aur dard bhara pada hai..

SANJEEV RANA said...

सुंदर रचना

sangeeta swarup said...

दर्द, आंसू, फरेब, दगा
ज़ख़्म अनगिनत तुम से खाया है
फिर वही भूल हो गई उससे
गैर का ख़त मेरे नाम आया है


बहुत खूब....जज्बातों को बखूबी लिखा है

संजय भास्कर said...

ज़िंदगी दर्द-ए-दिल को पूजती है
तुम से बिछड़े तो याद आया है
अब के फिर ना मिलें ख़्यालों में
ख़्वाब में रो के हम ने पाया है


इन पंक्तियों ने दिल छू लिया... बहुत सुंदर ....रचना....

संजय भास्कर said...

बहुत अच्छी प्रस्तुति संवेदनशील हृदयस्पर्शी मन के भावों को बहुत गहराई से लिखा है

संजय भास्कर said...

सुन्दर कवितायें बार-बार पढने पर मजबूर कर देती हैं. आपकी कवितायें उन्ही सुन्दर कविताओं में हैं.


ISI LIYE DOBARA CHALA AAYA...

Razi Shahab said...

aap sabhon ka hausla afzai ke liye shukriya

Sonalika said...

razi shahab
bahut behtreen lekhan hai apka
achi rachana'
shukriya.

राकेश कौशिक said...

लाजवाब प्रस्तुति

अमिताभ मीत said...

बहुत बढ़िया है भाई ...

Babli said...

बहुत ही सुन्दर और लाजवाब रचना! बधाई!

वन्दना अवस्थी दुबे said...

बहुत सुन्दर रचना.

Tripat "Prerna" said...

kya baat hai...

gaer ka khat mere naam...
wah wah wha


http://liberalflorence.blogspot.com/
http://sparkledaroma.blogspot.com/

डा. हरदीप सँधू said...

फिर वही भूल हो गई उससे
गैर का ख़त मेरे नाम आया है
bahut koob kha hai,
Khatt to vo azeez patar hain jo baar-baar pad kar bhee nae lagte hai.

Mubarak! aap ko khatt to aya, chahe gaer ka hee sahee.

Hardeep

sheetal said...

Bahut badhiya

हर्षिता said...

बहुत ही मार्मिक रचना है।

शबनम खान said...

bohot dino baad aj apka blog khona hua...pichle kuch dino ki apki sari rachnaye padhi...sach me...kitna khubsurat likhte ha aap...khaskar vo untitled rachna...dil ko chu gayi...bohot accha laga padhke....aise hi likhte rahiye....

योगेन्द्र मौदगिल said...

संवेदी रचना... साधुवाद..

आशीष/ ASHISH said...

Kya bhaiyaa,
Andar se likhi hai ek dum....
Chitthi aayee par galat address par!
Mazak ko darkinar karein, mujhe muaaf karein, behad umda likha hai aapne, daad hazir hai kubool karein!

Dr.Ajmal Khan said...

achha izhaare khyaal.......

निर्मला कपिला said...

फिर वही भूल हो गई उससे
गैर का ख़त मेरे नाम आया है
क्या गै भी खत लिखते हैं वाह बहुत खूब शुभकामनायें

अमृत पाल सिंह said...

वाह...बहुत खूब....

Tripat "Prerna" said...

kya baat hia...maja aa gaya :)

http://liberalflorence.blogspot.com/
http://sparkledaroma.blogspot.com/

अमृत कुमार तिवारी said...

wahhhh

Neelam said...

वक्त रूख़्सत हुआ मोहब्बत का
अब के नफरत का दौर आया है
ज़िंदगी दर्द-ए-दिल को पूजती है
तुम से बिछड़े तो याद आया है
अब के फिर ना मिलें ख़्यालों में
ख़्वाब में रो के हम ने पाया है
दर्द, आंसू, फरेब, दगा
ज़ख़्म अनगिनत तुम से खाया है
फिर वही भूल हो गई उससे
गैर का ख़त मेरे नाम आया है..
behadd umda.dil ko chhoo gayi aaapki ye rachna.