
याद आएंगे ये चुलबुले से कुछ पल
दुनिया के झमेलों से थक हार कर
जब उठाएंगे पुरानी डायरी
सच बहुत याद आएंगे ये पल
सुबह बहुत देर से होती थी अपनी
चांद बहुत देर तक रौशन रहता था अपने साथ
पहले सूरज से अपनी दोस्ती थी
मगर अब बड़े हो गए थे हम
चांद के साथ अपनी अच्छी बनने लगी थी
सच बहुत याद आएंगे ये पल
जब थक हार कर लौटेंगे घर
ज़िंदगी के झमेलों से उक्ता कर
जब पुराना बक्सा खोलेंगे
लबों पर मुस्कुराहट और आंखों में आंसू
रेंगने लगेंगे खुद ही
बिछडे परिंदों की याद में
डाल-डाल, रात-रात साथ-साथ
उडते रहते थे जिनके संग
सच बहुत याद आएंगे ये पल
जब थक हार कर उठाएंगे पुराना अल्बम
मगर तब
जिंदगी की ज़रूरतें उसे देखने की फुर्सत नहीं देंगी!!!