आज दिल से बस एक ही दुआ निकल रही है कि हर किसी को नया साल मुबारक हो... उसकी ज़िंदगी में कोई गम ना आए, हमेशा खुशियों का पहरा हो, कलियों की तरह खिलना और फूलों की तरह महकना हर किसी की पहचान बन जाए... हर आरज़ू हर तमन्ना हर चाहत पूरी हो... हर मकसद में कामयाब हों...कोई किसी से जुदा ना हो... हर किसी का ये नया सूरज हमेशा चमकता रहे...ख़ुदा करे कि ये नया साल
तेरे दामन में
वह सारे फूल खिला दे
कि जिनकी ख़ुश्बू ने
तेरे ख़्याल में
शमऐं जलाए रखी हैं
तो नए साल पर अपने हौसले बलंद कीजिए...हर बुराई से टकराने का मन बनाईए और किसी ग़लत चीज़ से समझौता ना कीजिए...फैज़ की इस नज़म से पोस्ट ख़त्म कर रहा हूं
बोल, कि लब आज़ाद हैं तेरे
बोल, ज़ुबां अब तक तेरी है
तेरा सुतवां जिस्म है तेरा
बोल कि जान अब तक तेरी है
देख की आहन-गर की दुकान में
तुन्द हैं शो'ले, सुर्ख है आहन
खुलने लगे कुफ्लों के दहाने
फैला हर एक ज़ंजीर का दामन
बोल, यह थोड़ा वक़्त बोहत है
जिस्म-ओ-जुबां की मौत से पहले
बोल की सच ज़िंदा है अब तक
बोल, जो कुछ कहना है कह ले





